३२ रुपये, सब कुछ ठीक है और कछुए दौड़ रहे थे सदियों से : अशोक कुमार की कविताएँ

३२ रुपये, सब कुछ ठीक है और कछुए दौड़ रहे थे सदियों से : अशोक कुमार की कविताएँ

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इन दिनों फेसबुक पर निरंतर लिख रहे अशोक कुमार की कविताओं ने ध्यान आकृष्ट किया है। इनकी कविताएँ एक आम आदमी की ज़िंदगी और उसके संघर्षों ...
Intact.. and also in shreds - Poems of Aparna Anekvarna.

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Aparna Anekvarna Poems are written not with words but feelings, things you see around you everyday get transformed into powerful vi...
पलायन एक पराजित का - सौरभ पांडेय की कविताएँ

पलायन एक पराजित का - सौरभ पांडेय की कविताएँ

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सौरभ पांडेय की कविताओं का स्वर  व्यक्तिपरक  है । कविताओं में निजी दुख , प्रेम और विरह का स्वर प्रभावी है लेकिन इनकी ताजगी आकर्षि...
नटई तक माड़ भात खाने वाली लड़की और बूढ़ा लेखक :  युवा कथाकार शिवेंद्र की कहानी

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       मारकेज़ के जादुई यथार्थवाद के बारे में कथाकार प्रियदर्शन अपने एक आलेख मे लिखते हैं , “मारक़ेज़ वह क्या करते हैं कि उनके छूते ही जाद...