The last train to the moon - Poems of Edina Barna 22:11:00 1 comment Edina Barna Words alone can not make a poem if they are not accompanied by emotions that pierce the soul and ravage the spirit – leaving you... Read More
मैं जब एक दूब की तरह सिर उठाता हूँ : संजय कुमार शांडिल्य की कविताएँ 05:13:00 No Comments संजय की कविताओं में आम आदमी का संघर्षपूर्ण जीवन और पूंजीवाद के शोर में उसकी गुम होती जा रही पहचान को सहेजने की बेचैनी है । ये प्रतिरोध की कव... Read More