"प्रेम, विश्वासघात, युद्ध, अलौकिक शक्तियाँ और गणिकाओं का मादक सौंदर्य"
समरसिद्धा, 8 वीं शताब्दी ईसापूर्व के भारतीय समाज और उसके जटिल समीकरणों के बीच बुनी कहानी है। सामंतों और पुरोहितों के पुरुष-प्रधान समाज द्वारा शोषित और अपमानित एक नारी, न सिर्फ इस अनैतिक व्यवस्था के प्राचीरों को ध्वस्त करने की प्रतिज्ञा लिए उठ खड़ी होती है बल्कि उसकी नींव रचने वाली अस्वस्थ धारणाओं को भी उखाड़ फेंकने का संकल्प लेती है।
पढ़ें किस तरह वह स्वयं को उन अलौकिक शक्तियों की साधना में समर्पित कर देती है जिनके बल पर वह सम्राटों और सामंतों से टकरा सके| किस तरह प्रतिशोध की प्रबल भावना उसे प्रेम में डूबी एक आकर्षक और अल्हड़ ब्राह्मण युवती से रक्तपिपासु चांडाल योद्धा बना देती है|
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किताब का अंश आप यहाँ पढ़ सकते हैं: http://media.wix.com/ugd/2f3d10_0971f5fadf9f4bf9a13a1ab85d7fe9af.pdf
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लेखक परिचय
संदीप नय्यर प्रशिक्षण से मैकेनिकल इंजीनियर हैं, पेशे से एक आईटी विशेषज्ञ और अपनी पसंद से एक लेखक. 1969 में रायपुर में जन्मे नय्यर ने कुछ वर्ष एक पत्रकार के रूप में भी गुजारे हैं और साप्ताहिक हिंदुस्तान में वे एक नियमित स्तंभ लिखते रहे थे. रिलायंस और रायपुर अलॉइज के साथ काम कर चुके नय्यर 2000 में ब्रिटेन चले गए और अब वे एक ब्रिटिश नागरिक हैं. यह उनका पहला उपन्यास है.
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Sandeep Nayyar
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Tel +447411252168
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